जशपुर । छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के विज़न को साकार करने की दिशा में दोकड़ा जशपुर में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII), अहमदाबाद के संयुक्त तत्वावधान में “उद्यमिता और स्वरोजगार पर उन्मुखीकरण” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं में स्वरोजगार और उद्यमिता के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उन्हें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में नए अवसरों के लिए तैयार करना था। यह पहल माननीय मुख्यमंत्री जी के “विकसित छत्तीसगढ़” के विज़न को साकार करने की दिशा में एक प्रभावी कदम है।
MSME क्षेत्र को सशक्त बनाने और मेक इन इंडिया पहल को गति देने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई। उद्योग एवं व्यापार विभाग के विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग एवं विपणन सहायता उपलब्ध करा रही है। भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII) के महानिदेशक डॉ. सुनील शुक्ला ने अपने संदेश में युवाओं को उद्यमिता को करियर विकल्प के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल नौकरी पाने वाला नहीं बल्कि रोज़गार सृजनकर्ता बनने की क्षमता रखता है। ईडीसी छत्तीसगढ़ टीम के नेतृत्वकर्ता प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार द्विवेदी ने राज्य में MSME विकास एवं सतत उद्यम सृजन के लिए संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि EDII द्वारा युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, व्यवसायिक परामर्श और विपणन सहयोग प्रदान कर स्थायी उद्यमिता मॉडल तैयार किए जा रहे हैं। कार्यशाला में 55 प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। सत्रों के दौरान भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान से डॉ. संदीप यादव एवं डेविड देशमुख, राहुल कुमार, सागर पटेल ने व्यवसाय योजना निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, ई-मार्केटिंग तकनीक, जोखिम विश्लेषण और नए व्यावसायिक अवसरों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों को स्थानीय संसाधनों के उपयोग से नवाचार आधारित उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि इस कार्यक्रम से उन्हें उद्यमिता की बारीकियों को समझने, व्यापार योजना तैयार करने और सरकारी योजनाओं से जुड़ने का अवसर मिला। यह आयोजन युवाओं में स्वावलंबन, आत्मनिर्भरता और नवाचार की भावना को बढ़ावा देने वाला सिद्ध हुआ। इस पहल को छत्तीसगढ़ सरकार की “विकसित छत्तीसगढ़” की परिकल्पना की दिशा में एक सार्थक एवं प्रेरणादायी कदम माना जा रहा है।













